ऐसी_भी_कोई_ख्वाहिश_नहीं

चलना चाहती हूँ उन रास्तों पर
जो तुम तक जाती हो,
मंजिल मिल जाये ,
ऐसी भी कोई ख्वाहिश नहीं

माना …हमारा साथ थोड़े कम पलों का हो,
लेकिन तुम्हारे हर वक्त पर मेरा हक हो ,
ऐसी भी कोई ख्वाहिश नहीं

तुम बेपरवाह हो तो वही सही ,
मेरी फिक्र तुम्हारा शुकून छीन ले ,
ऐसी भी कोई ख्वाहिश नहीं

सच है ये की तुम्हारे साथ
बिताये हर पल अनमोल थे ,
लेकिन तुम्हे भी उन पलों की कद्र हो ,
ऐसी भी कोई ख्वाहिश नहीं

फर्क तो ज़मीं आसमां का है हमदोनो में ,
और तुम क्षितिज की तलाश में निकल जाओ ,
ऐसी भी कोई ख्वाहिश नहीं

इंकार नहीं हां प्यार है मुझे
तुम्हारी मासूमियत से ,
लेकिन मुझसे भी तुम
प्यार करने की समझदारी दिखाओ ,
ऐसी भी कोई ख्वाहिश नहीं

तू अल्हड़ लहरें समंदर की ,
मै निर्जीव शांत सरोवर सी

तू चंचल रूप समीर का ,
मै थोड़ी गंभीर सी

तू नज़ारा शाम का ,
मै चिलचिलाती धूप सी

तू कागज़ रंगीन सा
मै तन्हा रंग सफेद सी …मै तन्हा रंग सफेद सी …..

 

By- Shuchi Smriti

Insta Id- shuchi_smriti_530

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