निकल खुद की तलाश में

खुद को तू आजाद कर आजाद कर इस दुनिया की माया से मकसद पहचान खुद की छोड़ दे वह माकन जिसमे तू है गुलाम पहचान कर खुद की तू निडर है राही अपनी नैया खुद संभाल ना दे चौकी दूसरों को छोड़ दे वो लोगो को जिस के इशारो पर था कभी तू नाचता अपना…

मै, मेरा इश्क और बनारस।

मैं इश्क़ लिखूं, तुम बनारस समझना कुछ यूं ही तुम इसे, मेरे प्यार का इजहार समझना। हर शाम की तरह उस शाम भी बैठा था गंगा किनारे निहार रहा था तुझे जैसे तेरी जुल्फें तेरी मुस्कान को छुपाती है वैसे ही कुछ घाट इस गंगा को फर्क सिर्फ इतना है कि शर्माना तुम्हारा गहना है…

The Journey Begins

Thanks for joining me! Good company in a journey makes the way seem shorter. — Izaak Walton