बनारस में अक्सर इश्क़ मुकम्ल होते देखा है

बनारस में अक्सर इश्क़ मुकम्ल होते देखा है भले जमीन में ना सही आसमां में होते देखा है अधूरा इश्क़ लिए मिले हम फिर बनारस की शोर में मुकम्ल की आस ना लिए छोड़ दिए गंगा की चरणों में सदियों के बिछड़े हुए गुम थे गंगा की लेहरो में आरती के वक़्त घाट में मिलते…